भक्ति का प्रतीक हैं नवरात्रः भारती

यमुनानगर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में मां के शरदीय नवरात्र के प्रथम नवरात्र पर रविवार को जगाधरी के हनुमान गेट के नजदीक स्थित आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में साध्वी अनिता भारती ने मां के नवरात्रों की महिमा के बारे में अवगत करवाया। मौके पर भजन कीर्तन का आयोजन भी किया गया। साध्वी अनिता भारती ने सबसे पहले सभी दिव्य ज्योति को नवारत्रों की शुभकामनाएं दी। जागृति उन्होंने फरमाया कि देवी मां के संस्थान द्वारा नवरात्र नवधा भक्ति का प्रतीक हैं। यमुनानगरइन नौ दिनों में हम मां का व्रत, हवन नवरात्रों के व पूजन आदि करके देवी मां को शुभारंभ पर प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। सत्संग का ताकि वे हमारे जीवन को सुख संपत्ति आयोजन एवं ऐश्वर्य से भर दें। इन दिनों माँस मदिरा का सेवन निषेध हो जाता है। लेकिन विचारणीय बात है कि मां दुर्गा शक्ति स्वरूपा हैं। उनका कण-कण में वास है। संपूर्ण प्रकृति में ही उनका नूर झलकता है। जीवन की आधार शक्ति का वंदन पूजन संपूर्ण ब्रह्मांड हर पल कर रहा है। फिर हम उस असीम सत्ता के लिए वर्ष के केवल नौ दिन ही क्यों चुनते हैं। मां दुर्गा धरती पर तब अवतरित हुई जब चारों और दुष्ट शक्तियां मानवता पर हावी हो चुकी थी। सभी देवताओं की शक्तियों के समूह से ही शक्ति पुंज प्रकट हुआ और उस शक्तिपुंज ने देवी मां का रूप धारण कर लिया। धर्म की रक्षा व आसुरी शक्तियों का विनाश करने हेतु मां ने नौ रूप धारण किए। दुर्गा सप्तशती में निहित आध्यात्मिक रहस्य संपूर्ण मानव जाति को समझाते हैं कि प्रत्येक इंसान के भीतर दैवीय और आसुरी दोनों शक्तियों का वास होता है। मगर जब हमारे सकारात्मक विचारों के समूह से वह शक्तिपुंज जागृत होता है जो साक्षात मां शक्ति का प्रतीक है। वह हमारे भीतर के सभी दुर्गुणों का नाश कर देता है। अपने भीतर संयम शक्ति को जागत करने के लिए व्रत उपवास किया जाता है। लेकिन आज के आधुनिकपरिवेश में उपवास के नाम पर कई खाद्य वस्तुओं का व्यापार किया जा रहा है। उपवास शब्द ही हमें व्रत की महिमा समझाने के लिए पर्याप्त है। उपवास का अर्थ होता है हर पल उस परम शक्ति के निकट वास करना। मनमानी से की गई भक्ति व पूजा हमें प्रभुसत्ता से नहीं मिला सकती। उसके लिए हमें पूर्ण संत सदरूसे ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त करके निरंतर ध्यान साधना का अभ्यास करना पडेगा। तभी हम मां शक्ति की उपासना पल प्रतिपल कर पाएंगे। मौके पर साध्वी भारती ने सुंदर भजनों के माध्यम से मां का गुणगान कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।